भुवनेश्वर , जनवरी 20 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने ओडिशा राज्य सूचना आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदक को एक साल तक नए सवाल पूछने से रोका गया था।

न्यायमूर्ति आरके पाठक की एकलपीठ अदालत ने सूचना आयोग के आदेश के खिलाफ फैसला सुनाते हुए कहा, "अदालत का यह भी विचार है कि याचिकाकर्ता पर एक कैलेंडर वर्ष में आरटीआई अधिनियम के तहत कोई और आवेदन न करने की लगाई गई रोक, लेकिन विभिन्न सार्वजनिक प्राधिकरणों के समक्ष एक वर्ष में केवल 12 आवेदनों की अनुमति देना उचित नहीं है। दूसरे शब्दों में अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि विपक्षी पार्टी नंबर 1 (राज्य सूचना आयोग) याचिकाकर्ता पर ऐसी कोई रोक नहीं लगा सकती थी, भले ही उसे आरटीआई अधिनियम के तहत जानकारी मांगने के लिए कई आवेदन दायर करने की आदत हो और इसलिए उस हद तक विवादित आदेश को रद्द किया जाना चाहिए।"अदालत ने आयोग के आदेश को रद्द करके आरटीआई अधिनियम के मूल उद्देश्य और नागरिकों के सरकार से उन मामलों पर जानकारी मांगने के अधिकार को बरकरार रखा है जो उन्हें महत्वपूर्ण लगते हैं।

गौरतलब है कि ओडिशा राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई आवेदक चित्तरंजन सेठी को तत्काल प्रभाव से एक साल की अवधि के लिए कोई भी और आवेदन दायर करने से रोक दिया था।

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