गांधीनगर , जनवरी 08 -- भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का केंद्र सोमनाथ मंदिर का इतिहास अडिग श्रद्धा और अविरत पुनर्निर्माण की अद्वितीय गाथा है।
गौरतलब है कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के अंतर्गत गुरुवार को गांधीनगर स्थित प्राचीन और प्रसिद्ध धोलेश्वर महादेव मंदिर से 72 घंटे के सामूहिक ओमकार नाद का प्रारंभ कराया।
सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम यह पवित्र धाम सदियों से भारतीय अस्मिता का रक्षक रहा है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और संघर्ष का इतिहास सोमनाथ मंदिर की भव्यता और समृद्धि ही प्राचीन समय में आक्रांताओं के लिए आकर्षण की वजह बन गई थी। 1025-26 ईस्वी में अफगानिस्तान के गजनी प्रांत के सुल्तान महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर अपना सबसे विनाशक और बर्बर आक्रमण किया था।
उस वक्त सोमनाथ अत्यंत समृद्ध धार्मिक केंद्र था, जिसे लूटने के लिए गजनवी ने रेगिस्तानी क्षेत्र के कठिन मार्गों को पार किया था। स्थानीय शासकों और लोगों ने उसका वीरतापूर्वक सामना किया, लेकिन गजनवी ने मंदिर को भारी नुकसान पहुंचाया और मंदिर की अकूत संपत्ति को लूट लिया। इसके बावजूद, गजनवी लोगों की आस्था को मिटाने में असफलत रहा। उसके जाने के बाद तुरंत ही चालुक्य (सोलंकी) शासकों ने मंदिर का पुनर्निर्माण कर संस्कृति को जीवित रखा।भारत की स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का नवनिर्माण राष्ट्रीय आत्मगौरव का विषय बन गया था। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में मंदिर का उसके मूल गौरव के साथ पुनर्निर्माण करने का संकल्प किया। उनके मार्गदर्शन में प्रसिद्ध शिल्पकार प्रभाशंकर सोमपुरा ने पारंपरिक चालुक्य शैली में भव्य मंदिर का निर्माण किया। 1951 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इस मंदिर लोकार्पण करते हुए इसे भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के श्री सोमनाथ ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद सोमनाथ के विकास में एक नया और आधुनिक अध्याय शुरू हुआ है। उनकी दूरदर्शी योजना के तहत मंदिर परिसर को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल दर्शन, सुरक्षा और सुविधाओं में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।प्रोमेनाड (वॉक-वे), समुद्र तट पर बना सुंदर पदयात्री मार्ग पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। टेक्नोलॉजी, भव्य 'लाइट एंड साउंड शो' के माध्यम से इतिहास को जीवंत रखने के प्रयास हुए हैं। संरक्षण, समुद्री क्षार और जंग से मंदिर को बचाने के लिए विशेष तकनीकी उपाय किए गए हैं। आज सोमनाथ मंदिर उन पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक विकास के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक बनकर खड़ा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित