रायपुर , नवंबर 06 -- कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने के आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार एक बार फिर कोयला खदानों की नीलामी करने जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह नीलामी देश के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार ने निजी वाणिज्यिक उपयोग के लिए कोयला खदानों की खुली नीलामी की सूचना जारी की है। इस नीलामी की प्रक्रिया 29 नवंबर तक इलेक्ट्रॉनिक ऑक्शन के माध्यम से पूरी की जाएगी। जिन 41 कोल खदानों की नीलामी की जा रही है, उनमें से 15 खदानें छत्तीसगढ़ में स्थित हैं, जो घने वन क्षेत्रों में आती हैं। इन खदानों के विकास के लिए लाखों पेड़ काटने पड़ेंगे, जिससे प्रदेश का पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होगा।
श्री शुक्ला ने कहा कि रायगढ़ जिले में प्रस्तावित चार कोल ब्लॉक लेमरू एलीफेंट रिज़र्व के क्षेत्र में आते हैं, जो हाथियों की आवाजाही वाला इलाका है। सूची में शामिल दो खदानें धरमजयगढ़ क्षेत्र की हैं, जो पहले से ही हाथी प्रभावित जोन में है। उन्होंने कहा,"यह सरकार लेमरू रिज़र्व के भीतर दो-दो माइंस विकसित करने की तैयारी में है, जबकि यह इलाका वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है।"उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों की लूट शुरू हो गई है। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से पहले ही हसदेव अरण्य के जंगल काटे गए, रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम के तहत आवंटित ज़मीन पर हरे-भरे पेड़ों को काटकर खदानें अडानी को दी गईं। बीजापुर में कोरंडम खदान के लिए बिना पर्यावरणीय अनुमति जंगल नष्ट किए गए, बैलाडीला और कांकेर में खदानें निजी पूंजीपतियों को बेची गईं।"उन्होंने आगे कहा कि अब सरकार मध्य भारत के 'फेफड़े' कहे जाने वाले हसदेव अरण्य और तमोर पिगला जैसे हरित क्षेत्रों में नई 15 कोयला खदानों की नीलामी कर रही है, जो प्रदेश की पर्यावरणीय सुरक्षा और जनजीवन दोनों के लिए खतरा है।
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