रायगढ़ , नवंबर 17 -- छत्तीसगढ़ में अडानी कंपनी के वादों के पूरे न होने से नाराज ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है और सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने बताया कि वे इससे पहले भी तीन बार ज्ञापन दे चुके हैं लेकिन अडानी कंपनी की ओर से किए गए आश्वासनों पर कोई अमल नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने गांव में हॉस्पिटल, स्कूल और स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया था। साथ ही प्रोजेक्ट से प्रभावित प्रत्येक परिवार को राशि के अंतर (डिफरेंस) को देने का आश्वासन भी दिया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि अब कंपनी अपने ही वादों से पीछे हट रही है। पहले कहा गया था कि यदि कोरबा वेस्ट को 9.30 रुपए से अधिक में खरीदा जाता है, तो सभी प्रभावितों को डिफरेंस राशि मिलेगी। लेकिन अब कंपनी यह कहकर पीछे हट रही है कि समझौता कोरबा वेस्ट से हुआ था, इसलिए राशि देना संभव नहीं है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सुपर प्रोजेक्ट की जनसुनवाई में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि औद्योगिक कार्य शुरू करने से पहले स्कूल और हॉस्पिटल का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके बावजूद आज तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कंपनी को निर्माण के लिए गांव के दो तालाबों-3.5 एकड़ और सात एकड़-की जमीन सौंपी लेकिन इसके बदले गांव में निस्तार, सिंचाई या पेयजल की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। "तालाब तक दे दिए, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिला," ग्रामीणों ने कहा।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि अडानी कंपनी को वादों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए, प्रभावितों को डिफेंस राशि का तत्काल भुगतान कराया जाए, और स्कूल व हॉस्पिटल निर्माण जल्द शुरू कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को तेज करेंगे।
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर ग्रामीणों सहित पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।
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