बेंगलुरु , नवंबर 15 -- प्रसिद्ध उद्योगपतिअज़ीम प्रेमजी ने शनिवार को विश्वविद्यालयों से एक सदी आगे की सोच रखने का आह्वान किया तथा समाज को आकार देने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका, मज़बूत संस्कृति, मूल्यों और उद्देश्यपूर्ण संस्थानों के निर्माण के महत्व पर ज़ोर दिया।
श्री प्रेमजी ने चाणक्य विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस 2025 पर आयोजित समारोह को वर्चुअल संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के नेतृत्व को बधाई दी तथा जन सेवा और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना में उनके असाधारण प्रयासों की सराहना की।
महज 21 साल की उम्र में विप्रो की कमान संभालने वाले और इसे एक हाइड्रोजनीकृत तेल कंपनी से एक वैश्विक प्रौद्योगिकी अग्रणी कंपनी में बदलने वाले प्रेमजी ने संस्थानों के निर्माण के अपने अनुभव से संस्कृति का महत्व, दीर्घकालिक विकास और छात्रों को शिक्षित करने का केंद्रीय कार्य ये तीन सबक बताए। उन्होंने कहा कि जब तक मूल्यों के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं होगी, तब तक संस्कृति का निर्माण और उसे मज़बूती नहीं मिल सकती।
उन्होंने ज़ोर दिया कि संस्थागत संस्कृति का निर्माण संकाय योग्यता, शोध पत्रों या बुनियादी ढांचे से नहीं, बल्कि संस्थान के उद्देश्य और उसके सदस्यों का मार्गदर्शन करने वाले मूल्यों से होता है। उन्होंने आगे कहा कि पूर्णता असंभव है, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है कि संस्कृति जीवंत रहे और संस्थान के मिशन के अनुरूप बनी रहे।
उन्होंने कहा, "चाणक्य विश्वविद्यालय एक सच्चे सार्वजनिक उद्देश्य वाले संस्थान के निर्माण के दुर्लभ और असाधारण प्रयासों में से एक है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप सिर्फ़ अगले 10 वर्षों के बारे में ही नहीं, बल्कि अगले 100 वर्षों के बारे में भी सोचें और विचार करें कि आज का हर कदम भविष्य में कैसे आगे बढ़ेगा।"उच्च शिक्षा की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, श्री प्रेमजी ने संस्थानों को याद दिलाया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य छात्रों को शिक्षित करना है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं, शोध महत्वाकांक्षाओं या अन्य गतिविधियों को इस मूल उद्देश्य पर हावी न होने देने के प्रति आगाह किया।
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