पटना , फरवरी 05 -- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार सभी क्षेत्रों में विकास के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही है और अगले पाँच वर्षों में बिहार एक विकसित राज्य बन जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विधानमंडल के दोनों सदनों के बजट सत्र के प्रथम दिन हुई संयुक्त बैठक में राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर वाद विवाद का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार विकसित बिहार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और अगले पांच वर्षों में इसे हासिल कर लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास की रफ्तार बढ़ाने की क्षमता वाली कई योजनाओं के क्रियान्वयन में केंद्र सरकार भी सहयोग कर रही है।

श्री कुमार ने कहा कि जुलाई 2024 के बजट में केंद्र सरकार ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना को मजबूत करने, उद्योगों तथा नदी जोड़ परियोजनाओं के लिए पर्याप्त आवंटन दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी 2025 के बजट में केंद्र सरकार ने मखाना की खेती से जुड़े किसानों की स्थिति में सुधार के लिए "मखाना बोर्ड" के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयास और केंद्र के सहयोग से बिहार आगे बढ़ रहा है और राज्य के लोगों की जिंदगी में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 तक राजद शासन के दौरान राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के सत्ता में आने के बाद इसमें व्यापक सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि राजग सरकार के सत्ता में आने से पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण इलाज के लिए महीने में मात्र 39 मरीज ही आते थे, जिसमे निरंतर बढ़ोतरी हुई है।

श्री कुमार ने कहा कि प्रदेश की राजग सरकार ने मरीजों को मुफ्त दवाएं देना शुरू किया, डॉक्टरों की तैनाती की और पीएचसी में अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पीएचसी में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 11,400 हो गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या मात्र छह थी, जो सरकार के प्रयासों से बढ़ाकर 12 हो गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) को विश्व के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में से एक बनाने के लिए कार्य प्रगति पर है और यहां विस्तार के बाद बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 5,400 की कर दी जाएगी । इसी तरह इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 3,000 की जाएगी, जबकि राज्य के अन्य पुराने मेडिकल कॉलेजों में बिस्तरों की संख्या 2,500 तक बढ़ाई जाएगी।

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