नयी दिल्ली , जनवरी 09 -- केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को यहां विज्ञान भवन में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर की 9वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में देश को पूरी तरह नशा मुक्त बनाना है।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अमृतसर कार्यालय का उद्घाटन भी किया। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस बैठक में केन्द्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के प्रमुख हितधारक तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन अंजेसियो एजेंसियों ने भाग लिया।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सभी विभागों को 2029 तक का रोडमैप और उस पर अमल के लिए समयबद्ध समीक्षा की पद्धति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह चुनौती कानून-व्यवस्था से ज़्यादा नार्को-टेरर के प्रश्न से जुड़ी है और सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि यह एक प्रकार से देश की आने वाली नस्लों को बरबाद करने का षड्यंत्र है। श्री शाह ने कहा कि युवाओं के स्वास्थ्य, उनके सोचने और प्रदर्शन की क्षमता और अपराध एक प्रकार से इस समस्या से ही जुड़े हैं। गृह मंत्री ने कहा कि 31 मार्च से हम सब एक साथ इस समस्या के खिलाफ 3 साल का एक सामूहिक अभियान चलाएंगे, जिसमें नशे की समस्या के खिलाफ सभी स्तंभों की कार्यपद्धति परिभाषित की जाएगी और लक्ष्य तय कर इसकी समयबद्ध समीक्षा होगी।

श्री शाह ने कहा कि विगत 11 साल में हमने नशे के खिलाफ लड़ाई में काफी सफलता प्राप्त की है और 2019 में एनकॉर्ड के पुनर्गठन के बाद हमने इस समस्या पर संपूर्ण नियंत्रण करने के रास्ते को भी सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा ,"अब हमने गति बना ली है और तीन सूत्रीय प्लान ऑफ एक्शन के साथ आगे बढ़ेंगे। हम ड्रग्स की सप्लाई चेन के प्रति सामूहिक रूथलैस अप्रोच, डिमांड रिडक्शन के प्रति स्ट्रेटेजिक अप्रोच और हार्म रिडक्शन के लिए ह्यूमन अप्रोच के साथ आगे बढ़ें, तभी नशामुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे।"केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एनकॉर्ड बैठकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन इसे और बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ज़िलास्तरीय व राज्यस्तरीय बैठकें नियमित रूप से होनी चाहिए। श्री शाह ने कहा कि भारत सरकार की अप्रोच बहुत स्पष्ट है कि ड्रग्स बनाने वाला और बेचने वाला, दोनों के प्रति कोई दयाभाव नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के पीड़ित के प्रति मानवतापूर्ण दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा ," कमांड, कम्प्लायंस और एकाउंटेबिलिटी को सुदृढ़ करते हुए ही हमें इस लढ़ाई में आगे बढ़ना चाहिए। अब हमें बैठकों की संख्या नहीं बल्कि इनके परिणामों की समीक्षा करनी चाहिए। नशे के व्यापार के किंगपिन, फायनेंसर और लॉजिस्टिक्स के रूट्स पर की जाने वाली कठोर कार्यवाही हमारी समीक्षा का मुद्दा होना चाहिए।"श्री शाह ने कहा कि फोरेंसिक प्रयोगशाला का उपयोग और समय पर चार्जशीट दाखिल कर सजा कराने की दर बढ़ाने को भी अपने लक्ष्यों में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि टॉप टू बॉटम और बॉटम टू टॉप अप्रोच ड्रग्स के पूरे नेटवर्क की जांच के लिए बेहद ज़रूरी है।

गृह मंत्री ने कहा कि नार्कोटिक्स के विरूद्ध लड़ाई की उपलब्धियां संतोषजनक हैं। उन्होंने बताया कि 2004 से 2013 के दौरान 40 हज़ार करोड़ रूपए मूल्य की 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स ज़ब्त की गई जबकि 2014 से 2025 के दौरान 1 लाख 71 हजार करोड़ रुपये मूल्य की 1 करोड़ 11 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई है। श्री शाह ने कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ हमारी मुहिम उत्साह देने वाली रही है। ड्रग्स को डिस्पोज़ करने की मात्रा में भी हम 11 गुना बढ़ोत्तरी कर सके हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में 10,770 एकड़ भूमि पर अफीम की फसल नष्ट की गई और नवंबर, 2025 तक 40 हज़ार एकड़ भूमि पर फसल को नष्ट किया गया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे ड्रग्स की समस्या से निपटने की अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार 31 मार्च तक एक रोडमैप तैयार करें, निगरानी तंत्र स्थापित करें और उस पर पूरी तरह फोकस करें, ताकि इस समस्या का संपूर्ण समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि हमें अगले तीन वर्षों में देश में ड्रग्स के खिलाफ सभी मोर्चों पर लड़ाई लड़कर 'नशा मुक्त भारत' बनाना है और देश के युवाओं को ड्रग्स से सुरक्षित रखने का प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ इस लड़ाई में निरंतर जागरूकता ही हमें सुरक्षित कर सकती है। हम एक ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जो इस लड़ाई को लड़ने में सक्षम हो।

श्री शाह ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में फॉरेंसिक साइंस लैब की बहुत अहम भूमिका है। जिन राज्यों में जब्त की गई ड्रग्स को नष्ट करने के काम की गति धीमी है, उन्हें इसमें तेजी लानी होगा। उन्होंने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों से आग्रह किया कि वे अपने राज्य में रोडमैप तैयार कर काम समय में ड्रग विनिष्टिकरण के लिए ठोस कदम उठाएं।

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