नयी दिल्ली , जनवरी 07 -- समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने की कोशिश इस प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की एक "गोपनीय साजिश" रची गयी है।
गौरतलब है कि पिछले संसदीय सत्र में पारित नया कानून - विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन -ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) अधिनियम, 2025, मनरेगा की जगह ले रहा है। इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी दी गई है। इसका ध्यान बुनियादी ढांचे और परिसंपत्तियों के निर्माण पर है, जिसमें तकनीक का उपयोग, मजदूरी के लिए केंद्र-राज्य के बीच 60:40 का नया वित्तीय अनुपात, पारदर्शिता (बायोमेट्रिक/जियो-टैगिंग) और पीएम गति शक्ति जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों से ग्रामीण कार्यों को जोड़ने का प्रावधान है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा एक सरकारी योजना थी, जो ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 100 दिनों के अकुशल मजदूरी कार्य की कानूनी गारंटी देती थी। इसका उद्देश्य आजीविका सुरक्षा बढ़ाना और सड़कों, तालाबों और जल संरक्षण संरचनाओं जैसे ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण करना था। यह न्यूनतम मजदूरी, पुरुष-महिला को समान वेतन और 15 दिनों के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता सुनिश्चित करती थी।
श्री यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर एक बयान पोस्ट करते हुए कहा कि मनरेगा का नाम बदलने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि यह भाजपा की उस मंशा को दर्शाता है जिसके तहत इस योजना को गुपचुप तरीके से खत्म करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा, "मनरेगा का नाम बदलने से कुछ नहीं बदलेगा। असल में यह मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की भाजपा की गुप्त साजिश है।"उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कई तरीकों से इस योजना को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, "एक तरफ भाजपा सरकार लगातार मनरेगा का बजट घटा रही है, दूसरी तरफ उसने राज्यों पर ऐसा वित्तीय दबाव बना दिया है कि केंद्र से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे में देरी और कमी के कारण पहले से खाली खजाने वाले राज्य यह सोचने को मजबूर हैं कि अतिरिक्त धन कहां से लाएं।" श्री यादव ने दावा किया कि इससे राज्य अंततः इस योजना को सीमित करने या छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।
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