चंडीगढ़ , जनवरी 15 -- पंजाब सरकार ने गुरुवार को पंजाब केसरी समूह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ये दावे कई प्रकार की जाँचों के दौरान सामने आये कानून के उल्लंघन के मामलों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब केसरी समूह निरीक्षणों और कार्रवाईयों की सूची तो प्रस्तुत कर रहा है, लेकिन उन कार्रवाइयों के कारणों, निष्कर्षों और परिणामों को जानबूझकर छिपा रहा है, जबकि ये सभी आधिकारिक निरीक्षण रिपोर्टों, वैधानिक नोटिसों और कारणयुक्त आदेशों में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

उन्होंने कहा, "इस पूरे मामले की शुरुआत न तो पत्रकारिता से है, न विज्ञापनों से और न ही संपादकीय विचारों से। इसकी शुरुआत आधिकारिक रिकॉर्ड पर दर्ज ठोस सबूतों से होती है।"उन्होंने कहा कि जालंधर स्थित पंजाब केसरी प्रिंटिंग यूनिट -2 में 18 उल्लंघन दर्ज किए गए, जिनमें अवरुद्ध अग्नि निकास, खराब अग्निशमन यंत्र, असुरक्षित विद्युत वायरिंग, सुरक्षात्मक उपकरणों का अभाव, खाली प्राथमिक उपचार बॉक्स, खराब स्वच्छता व प्रकाश व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण रिकॉर्ड प्रस्तुत न करना शामिल है।

उत्पीड़न के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब सरकार ने कहा कि श्रम, सुरक्षा और पर्यावरण क़ानूनों का प्रवर्तन प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर रोका नहीं जा सकता। सरकार ने कहा, "अवरुद्ध फायर एग्ज़िट, असुरक्षित वायरिंग या बिना उपचारित सीवेज के निर्वहन को नज़रअंदाज़ करना आपराधिक लापरवाही के समान होगा। "पंजाब सरकार ने "पूर्वनिर्धारित साज़िश" के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि विभिन्न विभागों की एक साथ की गई कार्रवाई यह दर्शाती है कि ये उल्लंघन पहले लंबे समय तक अनदेखे रहे थे। क़ानूनी कार्रवाई, भले ही विलंब से की जाए, केवल इसलिए दुर्भावनापूर्ण नहीं हो जाती कि अब उसे अंजाम दिया जा रहा है।

सरकारी विज्ञापनों को लेकर लगाए गए आरोपों पर पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक विज्ञापन कोई अधिकार नहीं है और इसे नियामक जाँच से बचाव का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। पंजाब सरकार ने स्वतंत्र, निर्भीक और ज़िम्मेदार प्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता किसी को भी आबकारी, पर्यावरण या श्रम क़ानूनों से छूट नहीं देती।

पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि जालंधर स्थित पार्क प्लाजा में की गई आबकारी कार्रवाई कोई सामान्य या नियमित निरीक्षण नहीं था, बल्कि एक औपचारिक जाँच का परिणाम था, जिसमें आबकारी क़ानूनों के कई गंभीर उल्लंघन सामने आए। जाँच के दौरान 800 से अधिक शराब की बोतलें अनधिकृत स्थानों से ज़ब्त की गईं। इसके साथ ही कई बोतलों पर अनिवार्य आबकारी होलोग्राम और क्यू आर कोड नहीं पाए गए। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि एक पेय जो मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त थी, उसे कई दिनों तक ग्राहकों को परोसा गया।

प्रवक्ता ने बताया कि ये सभी तथ्य लिखित आबकारी आदेश में दर्ज हैं, जो कारण बताओ नोटिस जारी करने, व्यक्तिगत सुनवाई, रिकॉर्ड की जाँच और लाइसेंसधारी द्वारा दी गई स्वीकारोक्तियों के बाद पारित किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि पहली मंज़िल पर 815 बोतलें और भूतल पर 140 बोतलें अनधिकृत स्थानों पर संग्रहीत की गई थीं, जो पंजाब लीकर लाइसेंस रूल , 1956 के नियम 37(2) का सीधा उल्लंघन है। ऐसे अनधिकृत भंडारण से राजस्व को खतरा और अवैध उपयोग की संभावना बनती है, जिस पर पंजाब आबकारी एक्ट , 1914 की धारा 36(c) के तहत कार्रवाई बनती है।

जाँच में यह भी दर्ज किया गया कि बिना लेबल, होलोग्राम और क्यू आर कोड वाली शराब का रखना और बेचना गंभीर अपराध है और "अज्ञानता" को किसी भी स्थिति में बचाव के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। पंजाब सरकार ने रेखांकित किया कि शराब लाइसेंसों का निलंबन पूरी विधिक प्रक्रिया का पालन करने के बाद किया गया और इसे बदले की कार्रवाई कहना यह संकेत देने के समान है कि आबकारी क़ानूनों को समान रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिए।

पंजाब सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्क प्लाजा में कार्रवाई केवल आबकारी उल्लंघनों तक सीमित नहीं थी। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई जाँचों में गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े उल्लंघन दर्ज किए गए। होटल के संचालन के दौरान लॉन्ड्री में प्रयुक्त रसायनों को बिना किसी उपचार के सीधे ज़मीन पर और सीवर में छोड़ा जा रहा था, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा था। होटल, जो रेड कैटेगरी की बड़ी इकाई है, वाटर एक्ट, 1974 और एयर एक्ट, 1981 के तहत आवश्यक "कंसेंट टू ऑपरेट" की अवधि 31 मार्च 2025 को समाप्त होने के बावजूद बिना वैध अनुमति के संचालित होता रहा।

जाँच में यह भी सामने आया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एस टी पी) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट कार्यशील नहीं थे और स्थायी बायपास व्यवस्था के ज़रिये बिना उपचारित सीवेज और अपशिष्ट जल को सीधे नगर निगम के सीवर में छोड़ा जा रहा था। अनिवार्य फ्लो मीटर या तो काम नहीं कर रहे थे या मौजूद ही नहीं थे, कोई परिचालन रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया और भूजल दोहन के लिए पंजाब जल विनियमन एवं विकास प्राधिकरण से कोई प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी उल्लंघन दर्ज किए, जिनमें प्राधिकरण का अभाव, रिकॉर्ड न रखना और डीज़ल जनरेटर तेल व कीचड़ जैसे खतरनाक अपशिष्ट के सुरक्षित भंडारण की कमी शामिल है।

पंजाब सरकार ने कहा कि ये केवल तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूक नहीं हैं, बल्कि ऐसी उल्लंघनाएँ हैं जो सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य, भूजल और पर्यावरण को खतरे में डालती हैं, और किसी भी ज़िम्मेदार सरकार द्वारा इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। नियामक गैर-अनुपालन केवल होटल तक सीमित नहीं था। श्रम एवं फैक्ट्री विभाग द्वारा संबंधित समूह से जुड़ी विभिन्न प्रिंटिंग इकाइयों में की गई जाँचों में श्रम क़ानूनों, सुरक्षा मानकों और वैधानिक रिकॉर्ड-रखरखाव में गंभीर और बार-बार उल्लंघन सामने आए।

इसी प्रकार लुधियाना के फोकल प्वाइंट स्थित जगत विजय प्रिंटर्स में निरीक्षण के दौरान ग्रेच्युटी व वेतन रिकॉर्ड प्रस्तुत न करना, मस्टर रोल और लेबर वेलफेयर फंड रिकॉर्ड का अभाव, अपर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था, मशीनों पर सुरक्षा गार्ड की कमी, असुरक्षित कार्यस्थल और अवरुद्ध आपातकालीन निकास पाए गए। पंजाब सरकार ने कहा कि इन सभी निरीक्षण रिपोर्टों से आबकारी, पर्यावरण और श्रम क्षेत्रों में नियामक उपेक्षा का एक स्पष्ट पैटर्न सामने आता है।

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