नयी दिल्ली , नवंबर 11 -- अक्टूबर में देश के प्रमुख शेयर सूचकांकों में सुधार के बावजूद म्यूचुअल फंड कंपनियों की शेयर निवेश योजनाओं में निवेशकों का आकर्षण कम हुआ और इन योजनाओं में निवेश इससे पिछले महीने की तुलना में 19 प्रतिशत घटकर 24,691 करोड़ रुपये रह गया।
सितंबर में इन योजनाओं में निवेश 30,422 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा था।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के सोमवार को जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार माह के दौरान फ्लेक्सीकैप में तेज़ी, मिड और स्मॉल-कैप में सुस्ती रही।
इक्विटी फंड में निवेश ऐसे समय नीचे आया है जबकि अक्टूबर में निफ्टी 50 और सेंसेक्स ने लगभग चर प्रतिशत की बढ़त दर्ज की । इक्विटी फंडों की अलग अलग श्रेणियों में माह के दौरान मिला जुला रुख रहा । फ्लेक्सीकैप फंडों में निवेश का आकर्षण बना रहा और उनमें 8,928 करोड़ रुपये का शुद्ध प्रवाह हुआ जो यह सितंबर से 27 अधिक है।
मिड-कैप कंपनियों के शेयरों पर केंद्रित कोषों में निवेश 25 प्रतिशत घटकर 3,807 करोड़ रुपये और स्मॉल-कैप में निवेश 20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,476 करोड़ रुपये रह गया।
अक्टूबर में ऋण प्रतिभूतियों पर केंद्रित कोषों में जोरदार चमक दिखी और लिक्विड फंडों ने सर्वाधिक 89,375 करोड़ रुपये तथा ओवरनाइट डेट फंड योजनाओं ने 24,050 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया। इससे पहले के दो महीनों में ऋण प्रतिभूति वाले कोषों से 1.59 लाख करोड़ रुपये निकाले गये थे। इसके विपरीत लम्बी अवधि की ऋण प्रतिभूति वाले कोषों में 942 करोड़ रुपये की निकासी दिखी। गिल्ट, क्रेडिट रिस्क और फ्लोटर फंड भी निकासी के दबाव में थे।
हाइब्रिड फंड में निवेश 51 प्रतिशत बढ़कर अक्टूबर में 14,156 करोड़ रुपये हो गया, जो सितंबर में 9,397 करोड़ रुपये था।
अक्टूबर में गोल्ड ईटीएफ में सबसे ज़्यादा 7,743 करोड़ रुपये आकर्षित किए, जो दर्शाता है कि सोने से जुड़े उत्पादों में रुचि मज़बूत बनी हुई है।
अक्टूबर में 18 नए फंड ऑफर (एनएफओ) जारी किये गये जिनसे कुल मिलाकर 6,062 करोड़ रुपये जुटाए गए, जिनमें से ज़्यादातर क्षेत्र विशेष से जुड़े या थीमैटिक फंड हैं। इस दौरान स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (एसआईएफ) ने 2,004 करोड़ रुपये जोड़े, जो मुख्य रूप से हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रैटेजी से प्रेरित थे।
श्रीराम एएमसी के एमडी और सीईओ कार्तिक जैन ने बताया कि म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए अक्टूबर का महीना कुल मिला कर एक मजबूत महीना रहा जिसमें इस उद्योग के प्रबंधनाधीन सम्पत्तियां ( एयूएम) एक माह पहले से 5.63 प्रतिशत बढ़कर 79.87 लाख करोड़ रुपये हो गयीं। इसमें शुद्ध निवेश के साथ बाजार मूल्य में 4 प्रतिशत की वृद्धि का भी योगदान है।
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