लखनऊ , मार्च 28 -- आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख मायावती 14 अप्रैल को भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर बड़े शक्ति प्रदर्शन के साथ चुनावी अभियान की शुरुआत कर सकती हैं।
बसपा के सूत्रों की मानें तो इस दिन प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जबकि मुख्य कार्यक्रम लखनऊ स्थित अंबेडकर स्मारक में होगा, जहां मायावती पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकती हैं। बैठक में बीएसपी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी शामिल होंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आकाश आनंद को संगठन मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को धार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि अगस्त 2025 में राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद मायावती पहले ही संकेत दे चुकी थीं कि आकाश आनंद को प्रदेश में अहम भूमिका दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पार्टी की रणनीति के तहत विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में आकाश आनंद की जनसभाएं कराई जाएंगी। इन सभाओं की शुरुआत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होगी, जहां दलित मतदाताओं की बड़ी संख्या होने के कारण इसे बसपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। पार्टी का फोकस युवाओं को जोड़ने के साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद से मिल रही चुनौती का मुकाबला करना भी होगा।
इधर, समाजवादी पार्टी भी चुनावी मोड में आ चुकी है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के दादरी में रैली कर अपने अभियान की शुरुआत करेंगे। समाजवादी पार्टी का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला BSP के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।
मायावती ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सपा की रणनीति के प्रति सतर्क रहने और दलित बहुल क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने राज्य स्तर से लेकर बूथ स्तर तक की समितियों के कार्यों की समीक्षा करने की भी बात कही है।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को मार्च के अंत तक बूथ समितियों के गठन का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दिशा में वे लखनऊ और आसपास के जिलों में लगातार बैठकें कर कार्यकर्ताओं को 14 अप्रैल के कार्यक्रम के लिए तैयार कर रहे हैं।
पार्टी नेताओं का दावा है कि अधिकांश बूथ समितियों का गठन पूरा हो चुका है और इसकी रिपोर्ट बैठक में पार्टी प्रमुख को सौंपी जाएगी। आगामी चुनावों से पहले बसपा का यह शक्ति प्रदर्शन प्रदेश की राजनीति में नई सक्रियता और मुकाबले के संकेत दे रहा है।
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