नयी दिल्ली , जनवरी 09 -- भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) से हटने की अमेरिका की घोषणा को विशेष तवज्जो नहीं देते हुए कहा है कि वह सौर ऊर्जा के प्रसार और गठबंधन के 125 सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लक्ष्यों को आगे बढाता रहेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यहां साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इससे संबंधित सवाल के जवाब में कहा, " हमने अमेरिका द्वारा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं से हटने की घोषणा को देखा है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने स्थापना के बाद से सौर ऊर्जा के प्रसार और अपने 125 सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के दायित्व को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हम इसके लक्ष्यों को आगे बढ़ाते रहेंगे।"प्रवक्ता ने कहा , " भारत बहुपक्षवाद में विश्वास करता है और उसका मानता है कि वैश्विक मुद्दों पर सभी देशों द्वारा परामर्शात्मक और सहयोगात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।"उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे जिसमें अमेरिका के 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हटने की घोषणा की गई। इनमें 31 संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध और 35 संगठन संयुक्त राष्ट्र से इतर हैं ।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन एक संधि-आधारित अंतरसरकारी संगठन है, जिसकी शुरुआत 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा पेरिस में आयोजित कॉप-21 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। इसका मुख्यालय गुरुग्राम में स्थित है।
आईएसए का उद्देश्य अपने 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देशों में सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सौर ऊर्जा का विस्तार करना है। 'टुवर्ड्स 1000' रणनीति के तहत, आईएसए का लक्ष्य 2030 तक सौर क्षेत्र में भारी भरकम निवेश को प्रोत्साहित करना है, जिसमें प्रौद्योगिकी और वित्तपोषण लागत को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य एक अरब लोगों को ऊर्जा पहुंच उपलब्ध कराना और 1,000 गीगावॉट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है। इन लक्ष्यों की प्राप्ति से वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी और प्रति वर्ष लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कटौती संभव होगी।
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