नयी दिल्ली , जनवरी 21 -- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को राजधानी में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बिहार राज्य में मतदाता सूची के शुद्धीकरण और उसके आधार पर हुए कराए गए विधान सभा चुनाव को भारत की मजबूत चुनाव प्रक्रिया के एक ताजा उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

श्री कुमार ने भारत मंडपम में आयोजित 'लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर भारत के अंतराष्ट्रीय सम्मेलन' का उद्घाटन करते हुए कहा कि बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एआईआई) का काम पूरी तरह सार्वजनिक निगरानी में सम्पन्न किया गया और उस पर अपील शून्य रही। उन्होंने कहा कि बिहार में नवंबर में कराये गये दो चरण के चुनाव में करीब एक लाख से अधिक मतदान केंद्रों में एक पर भी दो बार मतदान कराने की नौबत नहीं आयी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि भारत में चुनाव दुनिया की सबसे बड़ी कवायद हैं। पिछले चुनावों में एक अरब मतदाताओं में से 64 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने 10 लाख से अधिक मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। प्रत्येक बूथ पर औसतन 970 मतदाता होते हैं।

उन्होंने चुनाव प्रकिया में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को - एक आधारभूत स्तम्भ बताया। बीएलओ की यह जिम्मेदारी होती है कि सभी योग्य मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल हों।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की तैयारी और मतदान सम्पन्न कराना दो महत्वपूर्ण काम हैं। प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल करना सबसे महत्वपूर्ण काम है क्योंकि वही चुनाव का आधार होती है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधता और विशालता वाले देश में चुनाव करवाने में बड़ी लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है। बिहार में कुछ महीने पहले विधानसभा चुनाव हुए थे। वहां पहला काम पात्र मतदाताओं को शामिल करके मतदाता सूची को शुद्ध करना था। कानून के तहत किसी भी सीट की मतदाता सूची में ( किसी नाम के जुड़ने या घटने) को लेकर कोई भी मतदाता अपील कर सकता है ताकि गलत नाम शामिल न हों और कोई सही नाम बाहर न हो। लेकिन वहां नामों को लेकर अपील शून्य रही।'उन्होंने कहा कि भारत में राज्यों की मतदाता सूचियों की समीक्षा नागरिकों को राजनीतिक दलों की निगरानी में की जाती है।

उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के काम में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की महती भूमिका का भी उल्लेख किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा , 'बिहार और अन्य राज्यों में सभी नागरिकों की कड़ी निगरानी में मतदाता सूची को तैयार किया गया और फिर चुनाव हुए। एक भी बूथ पर दोबारा वोटिंग नहीं हुई।" उन्होंने कहा कि इसमें बड़ी कुशलता से काम करने की जरूरत होती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने तीन दिन के सम्मेलन में भविष्य के लिए लोकतंत्र की पुनर्कल्पना और चुनाव निकायों की कुशलता और स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी ताकि नयी उभरती चुनौतियों को देखते हुए चुनाव प्रक्रिया को मतदाताओं के लिए और आसान, पारदर्शी, निष्पक्ष बनाने के लिए सिफारिशें की जा सकें।

कार्यक्रम की शुरुआत यहां भारत मंडपम में एक औपचारिक स्वागत समारोह के साथ की गयी। इसमें विभिन्न देशों से आये प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का अभिनंदन किया गया।सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में लगभग 60 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया।

इस मौके पर डॉ. सुखबीर सिंह संधु ने कहा कि हर चुनाव के केंद्र में एक नागरिक होता है, जिसे यह भरोसा होता है कि उसकी पसंद का सम्मान और संरक्षण किया जाएगा। इस विश्वास की रक्षा करना निर्वाचन प्रबंधन निकायों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि आईआईसीडीईएम-2026 निर्वाचन प्रबंधन निकायों, शोधकर्ताओं, छात्रों और प्रैक्टिशनर्स को एक साझा मंच पर लाता है, जहां चुनावों को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा होती है।

सम्मेलन के विषय पर अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) के महानिदेशक राकेश वर्मा ने कहा कि भारत की अध्यक्षता का विषय एक समावेशी, शांतिपूर्ण, सहिष्णु और सुदृढ़ विश्व के लिए लोकतंत्र 21वीं सदी में लोकतंत्र की व्यापक और बहुआयामी भूमिका को दर्शाता है।

इस अवसर पर प्रतिभागियों को डॉक्यूमेंटरी शृंखला 'इंडिया डिसाइड्स' की झलकियां भी दिखायी गयीं, जिसे वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के सहयोग से तैयार किया गया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक अजीत मोहन ने कहा कि यह डॉक्यूमेंटरी शृंखला प्रभावशाली दृश्य माध्यम के जरिए दुनिया को भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनाव संचालन की जटिल प्रक्रिया से परिचित कराएगी।

उद्घाटन सत्र में करीब एक हजार प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 42 निर्वाचन प्रबंधन निकायों के प्रतिनिधि, 27 देशों के राजदूत एवं उच्चायुक्त, 70 से अधिक राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ, चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी तथा देशभर से आए 36 मुख्य चुनाव अधिकारी शामिल थे।

इस सम्मेलन का आयोजन स्वीडन स्थित अंतरसरकारी निकाय आईडीईए के सहयोग से किया जा रहा है। भारत आईडीईए का संस्थापक सदस्य है और श्री ज्ञानेश कुमार इस समय इसके अध्यक्ष हैं।

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