भोपाल , दिसंबर 10 -- अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आज 'महिला सशक्तिकरण एवं मानवाधिकार' विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए।विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि अधिकार और कर्त्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। अधिकारों को कानूनों में परिभाषित किया जा सकता है, किंतु कर्त्तव्य का बोध कराना और स्वयं समझना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ कर्त्तव्यों के पालन का भाव समाज में मजबूती लाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीनकाल से ही महिला सम्मान और सशक्तिकरण की परंपरा रही है और मातृशक्ति साहस, तपस्या, त्याग और विद्वता की प्रतीक रही है। तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या सरपंच से सांसद स्तर तक उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से करोड़ों महिलाएं उद्यमिता और सामाजिक कार्यों में योगदान दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण के लिए प्रभावी प्रयास हुए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश की बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त कर देश-प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाओं के मानवाधिकारों की रक्षा और उनका सशक्तिकरण सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी होने के साथ समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है जिसने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णतः पारदर्शी ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया लागू की है। हाल ही में 19 हजार से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की पारदर्शी भर्ती कर सरकार ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। सुश्री भूरिया ने कहा कि समाज और परिवारों को बेटियों के साथ ही बेटों में भी महिलाओं के सम्मान और संरक्षण के संस्कार बचपन से ही विकसित करना होंगे।

मानवाधिकार आयोग के सदस्य डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि मानवाधिकारों और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। यूएन वूमेन की स्टेट हेड सुश्री रे ने घर, सार्वजनिक स्थलों और डिजिटल स्पेस में महिलाओं के अधिकारों एवं सुरक्षा को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिला सशक्तिकरण योजनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं के प्रभावों का उल्लेख किया गया। कहा गया कि इन योजनाओं से प्रदेश के लिंगानुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आयोग के प्रमुख सचिव मुकेश चंद गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया और उप सचिव डीएस परमार ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं मानवाधिकार पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया गया और अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित