लखनऊ , दिसंबर 09 -- उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कहा कि अंतर्देशीय जल परिवहन प्रदेश के विकास का नया अध्याय सिद्ध हो सकता है। देश के 111 चिन्हित इनलैंड वॉटरवे में से 11 वॉटरवे उत्तर प्रदेश में स्थित हैं, जो राज्य की भौगोलिक सामर्थ्य और प्राकृतिक जल संपदा को दर्शाते हैं।

मंगलवार को लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की प्रथम बैठक को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि प्राचीन काल से ही जल मार्ग आवागमन का मुख्य साधन रहा है और भारत के अधिकांश ऐतिहासिक नगर नदियों के किनारे बसे हैं। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना के कोरिया समुद्री मार्ग से जाने का ऐतिहासिक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने कहा कि बलिया के सूराहा ताल तथा गोरखपुर के रामगढ़ ताल जैसे जल स्रोतों में पर्यटन विस्तार की अत्यधिक संभावनाएँ हैं।

उन्होने कहा कि पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए जल परिवहन सर्वश्रेष्ठ विकल्प बनकर उभर सकता है, क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन अत्यंत कम होता है। "यदि व्यक्तिगत स्तर पर भी रुचि लेकर इस दिशा में प्रयास किया जाए तो उत्तर प्रदेश परिवहन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

मंत्री ने सुझाव दिया कि फ्लोटिंग होटल, रेस्टोरेंट और वॉटर क्रूज के माध्यम से पर्यटन को नई ऊँचाइयाँ दी जा सकती हैं। जल परिवहन के साथ उद्योग और निवेश की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोज़गार मिलेगा।

बैठक में आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष सुनील पालीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में इनलैंड वॉटरवे प्रमुख है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले केवल 5 जलमार्ग विकसित थे। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 111 हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि गंगा नदी पर स्थित इन्लैंड वॉटरवे-1 उत्तर प्रदेश के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जलमार्ग विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना आवश्यक है। इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिये जमीन राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी, जबकि वित्तीय संसाधन केंद्र से मिलेंगे।

पूर्व सचिव एवं आईडब्ल्यूएआई के चेयरमैन टी.के. रामचंद्रन ने कहा कि वर्ष 2050 तक पूर्ण जलमार्ग विकास का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि एक जलपोत में 50-60 ट्रक के बराबर माल भेजा जा सकता है, जिससे लॉजिस्टिक लागत में भारी कमी आएगी।

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