कोच्चि , जनवरी 24 -- भारत की अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद ने अंतर्देशीय जल परिवहन को गति देने, माल ढुलाई के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और पर्यावरण के अनुकूल रसद समाधान विकसित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं और नीतिगत उपायों को मंजूरी दे दी है। सरकार ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की।
ऐसा प्रतीत होता है कि केरल को इस योजना से बड़ा लाभ होगा, क्योंकि उसके जलमार्गों को अंतर्देशीय जलमार्गों पर माल परिवहन को बढ़ावा देने वाली योजना में शामिल किया गया है, जिसके तहत माल मालिकों को परिचालन लागत का 35 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल की अध्यक्षता में अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) की तीसरी बैठक में ये निर्णय लिए गए। परिषद ने राष्ट्रीय जलमार्गों के विस्तार, केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने और यात्री एवं माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप को मंजूरी दी।
केरल और अन्य राज्यों में नदी क्रूज जेट्टी सहित 150 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जो क्रूज पर्यटन और यात्री बुनियादी ढांचे को एक बड़ा बढ़ावा देने का संकेत है।
श्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्ग भारत के रसद परिवर्तन का एक रणनीतिक स्तंभ बन गए हैं, जिससे रसद लागत कम करने, सड़कों और रेलवे पर भीड़ कम करने और कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि नदियों को अब केवल प्राकृतिक संपदा के रूप में ही नहीं, बल्कि विकास, संपर्क और स्थिरता को बढ़ावा देने वाली आर्थिक जीवनरेखाओं के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।
केरल के विशाल बैकवाटर और नहर नेटवर्क को एक प्रमुख अवसर के रूप में उजागर किया गया। परिषद ने घोषणा की कि जल वाहक योजना, जिसे प्रारंभ में चुनिंदा जलमार्गों पर शुरू किया गया था, को केरल सहित अन्य राष्ट्रीय जलमार्गों तक विस्तारित करने पर विचार किया जा रहा है।
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