ढाका , नवंबर 16 -- बंगलादेश का अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ एक मामले में सोमवार को फैसला सुनाएगा।

सुश्री हसीना पर पिछले साल हुए छात्र आंदोलन पर की गयी कार्रवाइयों के कारण उनकी अनुपस्थिति में यह मुकदमा चलाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल जुलाई और अगस्त में हुए छात्र आंदोलनों के कारण ही शेख हसीना की सरकार गिर गयी थी।

पुलिस, सेना और बॉर्डर गार्ड बंगलादेश (बीजीबी) ने विशेष रूप से सरकारी भवनों, सचिवालय और न्यायाधिकरण परिसर के पास अतिरिक्त चौकियां स्थापित की हैं।

अधिकारियों ने बताया कि हाल की आगजनी और देशी बम विस्फोट की घटनाओं के कारण सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। सरकार ने सभी से शांति की अपील की है, लेकिन कुछ छात्र संगठनों और विपक्षी राजनीतिक समूहों ने स्थिति को 'अस्थिर' करने की भी चेतावनी दी है।

इससे पहले, अवामी लीग ने अपने वरिष्ठ नेताओं पर राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमों और गिरफ्तारियों के विरोध में 13 नवंबर को 'ढाका लॉकडाउन' की घोषणा की थी। फिलहाल अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध है।

गृह मंत्रालय ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को फैसले से पहले और फैसले के दिनों में पूरी तरह सतर्क रहने का निर्देश दिया है। यह फैसला न्यायाधिकरण-1 की तीन सदस्यीय न्यायिक पीठ द्वारा सुनाया जा रहा है, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मजुमदार कर रहे हैं। न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और न्यायमूर्ति मोहितुल हक इनाम चौधरी इस पीठ के अन्य सदस्य हैं।

सुश्री हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर भी आरोप लगाये गये थे, लेकिन बाद में श्री अल-मामून सरकारी गवाह बन गये। मुकदमे की कार्यवाही 23 अक्टूबर को समाप्त हुई थी।

व्यावसायिक जगत की हस्तियों ने बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता पर चिंता व्यक्त की है और उम्मीद जतायी है कि आगामी राष्ट्रीय चुनाव देश में स्थिरता लायेंगे। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद से पार्टी नेता ऑनलाइन अभियान चलाते हुए अज्ञात स्थानों से सोशल मीडिया के माध्यम से निर्देश जारी कर रहे हैं।

जुलाई 2024 में आर्थिक तंगी, भ्रष्टाचार और रोज़गार संकट से उपजे छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण शेख हसीना की सरकार गिर गयी। पांच अगस्त को, वह भारत चली गयीं और श्री यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली। बाद में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गये।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ताओं ने कहा है कि जब हसीना और उनकी सरकार ने सत्ता बनाये रखने के प्रयास में प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर व्यवस्थित रूप से घातक बल का प्रयोग किया, जिसमें लगभग 1,400 लोग मारे गये। सुश्री हसीना ने मुकदमे में शामिल होने के लिए भारत से लौटने से इनकार कर दिया है और उन्होंने इन आरोपों का 'स्पष्ट रूप से' खंडन किया है कि उन्होंने भागने से पहले के हफ्तों में सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।

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