देहरादून , जनवरी 08 -- उत्तराखंड दौरे पर गुरुवार को पहुंची कांग्रेस महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने देहरादून में कहा कि राज्य में अंकिता भंडारी हत्याकांड में आए नए खुलासे से पूरा देश स्तब्ध और आक्रोशित है। जब तक पूरे प्रकरण की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की घोषणा नहीं होती कांग्रेस पार्टी चुप बैठने वाली नहीं है।

सुश्री शैलजा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि आज प्रदेश की राजनैतिक मामलों की समिति की बैठक थी, जिसमे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। जिसमें खास तौर से मनरेगा और अंकिता भंडारी प्रकरण शामिल हैं।

कांग्रेस नेत्री ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार मनरेगा की आत्मा को खत्म करना चाहती है। यहाँ सिर्फ़ नाम बदलने का मुद्दा नहीं है। यहाँ बात अधिकारों को खत्म करने की है। मनरेगा एक मांग-आधारित रोजगार का कानूनी अधिकार था, जिसमें सरकार काम देने के लिए बाध्य थी। नया कानून इसे एक आपूर्ति-आधारित योजना बनाता है, जहाँ काम की उपलब्धता केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित बजट और मापदंडों पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि यह मापदंड प्रधानों के अधिकारों को ख़त्म कर देगा। पॉवर के विकेंद्रीकरण का स्वरूप ख़त्म हो जाएगा।

सुश्री शैलजा ने कहा कि मूल योजना में श्रम लागत का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करती थी। नए कानून में अधिकांश राज्यों के लिए यह अनुपात 60:40 कर दिया गया है। जबकि पूर्वाेत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात रखा गया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ डालेगा, जिससे वे काम उपलब्ध कराने से हतोत्साहित होंगे। उन्होंने दावा किया कि नया कानून राज्यों को चरम कृषि मौसम के दौरान 60 दिनों तक काम रोकने की अनुमति देता है, ताकि खेतों में मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इससे मजदूरों की सौदेबाजी की शक्ति कम होगी और वे जमींदारों पर निर्भर होने के लिए मजबूर होंगे।

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