नयी दिल्ली , जनवरी 04 -- राजधानी दिल्ली में रविवार को विभिन्न राजनीतिकक दलों , संगठनों और हजारों प्रवासी उत्तराखण्डियों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम न उठाने का आरोप लगाया औरइस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच कराए जाने की मांग की।

यहां जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कर मांग की गयी थी कि अंकिता हत्याकांड की जांच शीर्ष न्यायालय के किसी न्यायाधीश की देखरेख में सीबीआई से करायी जाए। धरना प्रदर्शन में लोगों में काफी आक्रोश देखा गया।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि अंकिता हत्याकांड के मामले में जो नयी जानकारी सामने आयी है उसे देखते हुए सरकार को शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।

उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने 10 दिन के भीतर सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए तो उत्तराखंड के लोग हजारों की संख्या में दिल्ली में भाजपा मुख्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे1 इसके साथ ही दिल्ली के कोने-कोने में हस्ताक्षर अभियान और कैंडल मार्च आयोजित किए जाएंगे।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता नरेंद्र सिंह नेगी ने इस मामले में जन आंदोलन को और व्यापक तथा मजबूत करने पर जोर दिया।

जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्र ने सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि प्रदेश सरकार की मानसिकता महिलाओं के प्रति नफरत से भरी हुई है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सबकी है और सबको मिलकर लड़नी है।

धरना प्रदर्शन में उत्तराखंड क्रांति दल के नेता एवं कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। इस विरोध-प्रदर्शन की अध्यक्षता वरिष्ठ महिला नेत्री उमा जोशी ने की।

धरने के उपरांत भू कानून संयुक्त संघर्ष समिति के एक शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नाम एक ज्ञापन दिया, जिसमें अंकिता हत्याकांड की जांच शीर्ष न्यायालय के किसी न्यायाधीश की देखरेख में सीबीआई से कराने की मांग की गई।

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