देहरादून , जनवरी 10 -- उत्तराखंड में अंकिता भंडारी प्रकरण का भूत राज्य सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है। शुक्रवार को पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी की ओर से पुलिस महानिदेशक को प्रकरण में शामिल कथित वीआईपी के विरुद्ध प्राथमिकी प्रस्तुत की। जिस पर थाना बसंत विहार में तत्काल उसे पंजीकृत कर लिया गया। इसी मध्य मुख्यमंत्री ने प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी।

शनिवार को इसी मामले में गढ़वाल परिक्षेत्र के महानिरीक्षक पुलिस (आइजी) राजीव स्वरूप ने संवाददाता सम्मेलन में आम जनमानस से अपील की कि भ्रामक सूचनाओं या अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि उक्त प्रकरण से सम्बन्धित कोई साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहता है तो वह पुलिस अथवा जांच एजेन्सी के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।

उन्होंने बताया कि थाना बसंत विहार जनपद देहरादून में डॉ0 अनिल प्रकाश जोशी, पर्यावरणविद, पद्मभूषण, पदमश्री द्वारा दिनांकः 09-01-2026 को एफआईआर सॅख्याः 06/2026 धारा 238, 249, 45 बीएनएस का अभियोग पंजीकृत कराया गया।

श्री स्वरूप ने कहा कि पुलिस प्रशासन एवं शासन इस प्रक्रिया को लेकर काफी गम्भीर है। मुख्यमन्त्री द्वारा प्रकरण की संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुये स्वयं स्व0 अंकिता भण्डारी के माता-पिता से वार्ता कर उनके विचारों को सुना तथा प्रकरण की गम्भीरता को देखते हुये विवेचना सीबीआई से कराये जाने को निर्देशित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रकरण से सम्बन्धित समस्त अभिलेख गढ़वाल परिक्षेत्रीय कार्यालय द्वारा पुलिस मुख्यालय प्रेषित किया जा चुका है। जो शासन स्तर से केद्रीय जांच एजेन्सी (सीबीआई) को भेजा जायेगा।

आइजी ने बताया कि स्व अंकिता भण्डारी हत्याकाण्ड प्रकरण में प्रारम्भ से ही पुलिस द्वारा तत्काल वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। जिसके द्वारा उक्त प्रकरण में साक्ष्य संकलन कर तीनो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उन्होंने बताया कि प्रभावी पैरवी किए जाने से अभियुक्तों को एक दिन की भी जमानत नहीं मिली। पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर माननीय न्यायालय द्वारा तीनों अभियुक्तों को कठोरतम दण्ड, आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित