गोरखपुर, जनवरी 2 -- नए साल की शुरुआत आसमान में एक दुर्लभ खगोलीय संयोग के साथ होने जा रही है। आगामी 3 जनवरी को पूर्णिमा पर आकाश में 'वुल्फ मून' नजर आएगा। चांद बड़ा और चमकीला दिखेगा। इसी दिन पृथ्वी, सूर्य के सबसे निकट बिंदु पर भी पहुंचेगी, जिसे खगोल विज्ञान में उपसौर (पेरीहेलियन) कहा जाता है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जनवरी माह की पूर्णिमा को 'वुल्फ मून' कहा जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार सर्दियों के मौसम में भेड़ियों की आवाजें अधिक सुनाई देने के कारण इस पूर्णिमा का यह नाम पड़ा। चंद्रमा, पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट होने के कारण सामान्य से कुछ बड़ा और अधिक चमकीला नजर आएगा। मौसम साफ रहने पर इसे बिना दूरबीन या किसी विशेष उपकरण के आसानी से देखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा उस अवस्था को कहते हैं,...