नई दिल्ली, सितम्बर 4 -- इस साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से श्राद्धपक्ष शुरू हो रहा है। पितृपक्ष में पितरों के तर्पण करने का विधान है। ऐसा कहा जाता है कि साल भर के अतृप्त पितर, इस पक्ष में तृप्त होने के लिए धरत पर आते हैं, उन्हें तर्पण देने और ब्राह्मण को भोजन कराने से वो तृप्त होकर आशीर्वाद देकर वापस लौट जाते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण करना बहुत जरूरी है,वरना हो बिना तृप्त होकर धरती से ऐसे ही लौट जाते हैं। क पुराणों में इसका जिक्र है कि पितृपक्ष में श्राद्ध करना बहुत जरूरी है। इस साल प्रतिपदा तिथि सात सितंबर को रात्रि 11:47 बजे लगेगी जो आठ सितंबर को रात्रि 10:15 बजे तक रहेगी। मातृ नवमी 15 सितंबर को पड़ेगी। यदि महिला की मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो तो इस दिन उनके श्राद्ध का विधान है। 17 सितंबर को इंद्रा एकादशी के व्रत-उपवास और...
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