नई दिल्ली, जनवरी 22 -- नीट पीजी काउंसलिंग के तीसरे राउंड से पहले कटऑफ घटाया जाना पिछले कुछ सालों से एक आम बात हो गई है। हालांकि इस बार इस पर बहस तेज हो गई। जहां स्वास्थ्य मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और अन्य लोगों ने इस कदम को बड़े पैमाने पर खाली मेडिकल पीजी सीटों को भरने के लिए एक जरूरी कदम बताया है, खासकर नॉन-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल मेडिकल ब्रांच में, वहीं विरोधियों का कहना है कि इससे मेडिकल शिक्षा के स्टैंडर्ड कम होंगे और यह मुख्य रूप से मोटी फीस वाले प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के फायदे के लिए किया गया है। हालांकि सच्चाई दोनों दावों से थोड़ी अलग है। करियर360 की रिपोर्ट के मुताबिक एडमिशन का दायरा बढ़ने से सभी तरह की स्पेशलाइजेशन में सीटें भरने में मदद मिलेगी, न कि सिर्फ नॉन-क्लिनिकल में। प्राइवेट इंस्टीट्यूट के साथ-साथ राज्य और कें...