नई दिल्ली, जनवरी 13 -- सनातन में मकर संक्रांति के पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन से भगवान सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य की उपासना और गंगा स्नान विशेष फलदायी माना जाता है। अलग-अलग समाज के लोग इसे अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। हालांकि इस बार मकर संक्रांति मनाने के लिए तिथि को लेकर पंचांगों में भेद है। काशी और मिथिला पंचांग के अपने-अपने मत हैं। इसलिए निर्णय सिंधु के अनुसार अपने-अपने क्षेत्र के लोकाचार्य के अनुसार कोई 14 को तो कोई 15 को मकर संक्रांति का त्योहार मनाएगा।मिथिला पंचांग में 14 को मकर संक्रांति मिथिला पंचांग का जिक्र करते हुए पंडित लोचन मिश्र बताते हैं कि 14 जनवरी बुधवार को रात्रि में 9:04 बजे संक्रांति हो रही है। मत बताता है कि 6:24 घंटा पहले और 6:24 घंटा बाद तक पुण्य काल रहता है। इसलिए 14 को ही मकर सं...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.