नई दिल्ली, फरवरी 24 -- हिरण्यकश्यप का धैर्य छूट रहा था। लाख समझाने पर भी उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति से नहीं डिग रहा था। इससे नाराज होकर उसने प्रह्लाद को दंड देने के लिए क्रूर यातनाएं देना शुरू किया। पहले प्रह्लाद को ऊंचे पहाड़ की चोटी से नीचे गिराया, लेकिन उसे कुछ नहीं हुआ।होलाष्टक में प्रह्लाद को कैसे दंड मिले जिस दिन प्रह्लाद को ऐसे कठोर दंड देने की शुरुआत हुई, उस दिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी थी। इसके बाद प्रत्येक दिन उसे इस प्रकार के कठोर दंड दिए जाने लगे।कभी उसे हाथी के पैरों तले कुचलवाया गया। कभी गर्म तेल के कहाड़े में डाला गया, लेकिन प्रह्लाद पर कोई आंच नहीं आई। यातना देने का यह क्रम आठ दिनों तक चला। हारकर नौवें दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन 'होलिका' की गोद में प्रह्लाद को बैठाकर जिंदा जलाने की चेष्टा की। होलिक...