हिन्दुस्तान ब्यूरो, जनवरी 2 -- आयुर्वेद प्राचीन काल से ही भारतीय चिकित्सा पद्धति का अभिन्न अंग रहा है और वर्तमान में आयुर्वेदिक फार्मेसी एक आकर्षक करियर विकल्प के रूप में उभर रहा है। इसके बावजूद, झारखंड के युवाओं में इस क्षेत्र के प्रति रुचि कम होती दिख रही है। आलम यह है कि राज्य के एकमात्र सरकारी संस्थान, राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी महाविद्यालय (साहिबगंज) में डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी.फार्मा, आयुर्वेद) की पढ़ाई के लिए छात्र नहीं मिल रहे हैं। झारखंड राज्य आयुष चिकित्सा परिषद की ओर से शैक्षणिक सत्र 2025-27 में 30 सीटों पर नामांकन के लिए 17 अक्तूबर को आईएससी/10+2 (विज्ञान) उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 29 नवंबर निर्धारित थी, लेकिन इस अवधि तक परिषद को महज 25 आवेदन ही प्राप्त हुए। सीटों की तुलना में आवेदन...