नई दिल्ली, फरवरी 21 -- प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि ''कानून समाज को निरंकुशता से बचाने के लिए बनाया गया एक किला बनकर नहीं रह सकता'' और उन्होंने युवा वकीलों से इसे एक ऐसा ''मंच'' बनाने का आह्वान किया जहां मतभेदों पर बहस हो, अधिकारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया जाए और सत्ता के साथ तर्क-वितर्क किया जाये। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पेशेवरों से आग्रह किया कि वे कानून को एक बंद किले के रूप में नहीं बल्कि एक जीवंत, विकसित होते सार्वजनिक स्थान के रूप में देखें। प्रधान न्यायाधीश ने कानून की ऐतिहासिक यात्रा के लिए एक शक्तिशाली रूपक के रूप में मेहरानगढ़ किले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''किले का निर्माण रक्षा के लिए, अव्यवस्था और अनिश्चितता से बचाव के ल...