नई दिल्ली, फरवरी 14 -- आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी प्राचीन काल में थीं। उन्होंने जीवन की हर सच्चाई को बिना किसी लाग-लपेट के सामने रखा है। उनकी एक नीति में बहुत कड़वा लेकिन गहरा सच छिपा है - आंखें होने के बावजूद कई लोग अंधे की तरह व्यवहार करते हैं। वे सब कुछ देखते हैं, समझते हैं, फिर भी बार-बार वही गलतियां दोहराते हैं। यह मानसिक अंधापन व्यक्ति को भीतर से खोखला कर देता है और जीवन की सही दिशा से भटका देता है। आचार्य चाणक्य ने इस कड़वे सत्य को बहुत ही सरल और प्रभावी ढंग से व्यक्त किया है। आइए उनकी नीतियों के माध्यम से समझते हैं कि वे किस तरह के लोगों को आंखें होते हुए भी अंधा मानते थे।आंखें होते हुए भी अंधापन चाणक्य कहते हैं कि सच्ची दृष्टि केवल देखने की क्षमता नहीं है, बल्कि सही-गलत में अंतर करने की क्षमता है।...
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