पटना, नवम्बर 9 -- Bihar Elections: बिहार चुनाव में इस बार सुखद अनुभव रहा। मुद्दों पर वार-पलटवार, वायदों की बिसात और सहूलियतों-सपनों का मोहपाश। मुद्दों को आगे रखना और बिहार की समस्याओं, चुनौतियों पर तीन तरफा शास्त्रार्थ। सभी पार्टियां यह आश्वस्त करने को मजबूर हुईं कि बिहार में रोजगार पैदा होंगे, नौकरियां मिलेंगी और उद्योग लगेंगे। बिहार विकसित प्रदेश बनेगा। पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, कांग्रेस लीडर राहुल गांधी समेत सब नेताओं ने नौकरी और रोजगार को टॉप प्रायोरिटी पर रखा। इन सभी सुखद पहलुओं के बीच एक अफसोस जरूर रह गया कि बिहार की सियासत सामाजिक समीकरण साधने में हांफती नजर आई। इसे कमजोर कड़ी भी माना। नेताओं की तैनाती की रणनीति बनाई गई। मिशन 2025 में किला फतह के लिए राजनीतिक दलों ने सामाजिक समीकरण साधने को श...