इंदौर, जनवरी 11 -- इंदौर नगर निगम के अफसरों ने शहरवासियों को 24 घंटे शुद्ध पानी देने के जो सपने दिखाए थे, वे आज कागजों तक ही सिमट कर रह गए हैं। बीते चार वर्षों में स्वच्छता और जल प्रबंधन पर करीब आठ हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद इंदौर के नागरिक आज भी दूषित और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। चालू वित्तीय वर्ष में निगम ने 2450 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन हालात यह हैं कि करोड़ों की योजनाएं आम जनता की सेहत तक नहीं पहुंच पा रहीं।पानी महंगा तो शुद्ध क्यों नहीं? नगर निगम हर साल औसतन 250 करोड़ रुपये केवल जल आपूर्ति और उसके रख-रखाव पर खर्च करता है। इसमें नर्मदा पाइप लाइनों की मरम्मत, बोरिंग मेंटेनेंस, जलूद से पानी लाने की व्यवस्था और भारी बिजली खर्च शामिल है। अफसरों का दावा है कि जलूद से इंदौर तक नर्मदा का पानी पहुंचाने...
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