जमशेदपुर, अगस्त 5 -- मैंने बिनोद बिहारी महतो के धनबाद कार्यालय में शिबू सोरेन से पहली बार 10 सितंबर 1978 को भेंट की थी। इस दौरान दोनों से आग्रह किया कि आप सिंहभूम जिला में हमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैनर में काम करने का अवसर प्रदान करें। उन्होंने मेरी बात मान ली और 25 सितंबर 1978 को चक्रधरपुर में एक विशाल जनसभा में कोल्हान झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना हुई। इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा मजबूत होती चली गई। शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन के आरंभिक वर्षों में आदिवासी समाज में व्याप्त विभिन्न प्रकार की कुरीतियों, रूढ़ियों और अंधविश्वासों के खिलाफ एक लंबी और निर्णायक लड़ाई लड़ी। झारखंड के राजनीतिक क्षितिज पर उभरे शिबू सोरेन की संघर्ष गाथा एक छोटे से गांव नेमरा के अत्याचारी और आतताई, सूदखोर, महाजनों के शोषण, उत्पीड़न और दोहन के विरोध में ...
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