जयपुर, अगस्त 27 -- जब भी गणेश जी का ज़िक्र आता है, तो हमारी आँखों के सामने उनकी वही पारंपरिक छवि उभरती है-सिर पर मुकुट, चार भुजाएँ और दोनों ओर उनकी प्रिय पत्नियाँ रिद्धि और सिद्धि विराजमान। लेकिन सोचिए, अगर कहीं आपको गणपति जी रिद्धि-सिद्धि के साथ नहीं बल्कि धन के देवता कुबेर के साथ बैठे दिखें, तो? जी हाँ, यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि सच्चाई है। चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर एक साधारण-सा मकान इस दुर्लभ जोड़ी को अपने आंगन में सहेजे बैठा है। और यही वजह है कि यह मकान आज श्रद्धा, रहस्य और विस्मय-तीनों का केंद्र बन चुका है। 52 वर्षीय सतीश सुखवाल बताते हैं कि इस जोड़ी की स्थापना उनके पूर्वजों ने लगभग 200 से 250 साल पहले की थी। उस समय ये मूर्तियाँ एक कच्चे मकान की दीवार में जड़ दी गई थीं। वक्त बदला, मकान पक्का हो गया, लेकिन मूर्तियाँ आज भी उसी स्थान पर ...
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