आशीष दीक्षित, दिसम्बर 9 -- सेंथल का एक मुस्लिम युवक 1857 की जंग-ए-आजादी से जुड़े भूले-बिसरे इतिहास को फिर से जीवित करने के मिशन पर जुटा है। यह युवा 1857 के शहीद खेमकरन और भोले बेलदार की स्मृति में नवाब गालिब अली के परिवार द्वारा बनाए गए मंदिर का जीर्णोद्धार कराना चाहता है। मंदिर आज जर्जर हाल में है और अपनी पहचान लगभग खो चुका है। युवक ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इसे राज्य का ऐतिहासिक धरोहर स्थल घोषित करने और संरक्षण की मांग की है। इस अभियान में शहीदों के वंशज भी उसके साथ खड़े हैं। रुहेलखंड के नवाब खान बहादुर खान ने 1857 में जब अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका, तो सेंथल के नवाब गालिब अली भी उनकी मुहिम में शामिल हो गए। उन्होंने खेमकरन और भोले बेलदार के नेतृत्व में एक फौजी टुकड़ी जंग-ए-आजादी में भेजी। गदर की समाप्ति के बाद यह टुकड़ी अंग्रेजों ...