मुजफ्फरपुर, मार्च 8 -- मुजफ्फरपुर। लोगों को संजीवनी देने वाली भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद उपेक्षा का शिकार है। सरकारी तंत्र की लापरवाही से यह खत्म होने की कगार पर है। हाल यह है कि पिछले 13 साल से औषधियां नहीं आने से सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सक अब अंग्रेजी दवा लिख रहे हैं। कहते हैं, कैसी मजबूरी है कि हमने जिस विधा की पढ़ाई की, उसका इस्तेमाल मरीजों के इलाज में नहीं कर पा रहे। दूसरी ओर, काउंसिलिंग के बाद भी हजारों चिकित्सक अस्पतालों में तैनाती की बाट जोह रहे हैं। इनका कहना है कि सरकार आयुर्वेद चिकित्सा और चिकित्सकों पर ध्यान दे तो न केवल रोगियों को नया जीवन मिल सकेगा, बल्कि आयुष चिकित्सक भी खुशहाल जिंदगी जी सकेंगे। मुजफ्फरपुर के आयुर्वेदिक डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी लापरवाही से अस्पतालों में बरसों से दवाएं नह...
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