रायपुर, सितम्बर 25 -- रायपुर के 83 साल के बुजुर्ग की जिंदगी एक छोटे से झूठे आरोप ने तहस-नहस कर दी। 1986 में मध्य प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एमपीएसआरटीसी) में बिल असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे जागेश्वर पर मात्र 100 रुपये की रिश्वत लेने का इल्जाम लगा। यह मामला इतना लंबा खिंचा कि 39 साल बाद, 24 सितंबर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया। लेकिन तब तक जागेश्वर की जिंदगी के कई सपने चूर-चूर हो चुके थे।1986 में लगा था 100 रुपये की रिश्वत का आरोप कल्पना कीजिए, आज की महंगाई के दौर में 100 रुपये की वैल्यू क्या होगी? लेकिन 39 साल पहले यह रकम जागेश्वर के लिए जहर बन गई। एक पैसेंजर ने आरोप लगाया कि जागेश्वर ने टिकट के बदले रिश्वत मांगी। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहरा दिया, नौकरी गई और एक आम आदमी की जिंदगी रुक सी गई। लेक...
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