नई दिल्ली, सितम्बर 23 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले की सुनवाई करते हुए अपने एक अहम फैसले में कहा है कि वैवाहिक विवाद में नाबालिग बच्चे को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना गलत है। हाईकोर्ट ने यह माना है कि पति या पत्नी द्वारा नाबालिग बच्चे को जानबूझकर दूसरे माता-पिता से अलग करने की कोशिश न सिर्फ मनोवैज्ञानिक क्रूरता है, बल्कि यह तलाक का वैध आधार हो सकता है। हाईकोर्ट ने यह फैसला एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया, जिसने सितंबर 2021 में एक फैमिली कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें क्रूरता के आधार पर विवाह को भंग कर दिया गया था। हिन्दुस्तान टाइम्स कि रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने 19 सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि वैवाहिक विवादों में बच्चे को हथियार के रूप में इस...
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