हमीरपुर, जनवरी 26 -- मौदहा, संवाददाता। कमहरिया में सूफ़ी बदरउद्दीन निजामी के सालाना उर्स के अवसर पर उन्हीं के आस्ताने में मनकबती तरही मुशायरा संपन्न हुआ। जिसकी सदारत सज्जादगान आलिया हाफ़ज़ि वली मोहम्मद व हाफ़ज़ि लाल मोहम्मद ने की। मुशायरे का आग़ाज़ मसीह निज़ामी ने नात पढ़कर किया। उसके बाद दिए गए मिसरे 'तसव्वफ़ का हमें तो बस यही मरकज नज़र आया' यावर मौध्वी ने अपने इस शेर पर जमकर दाद बटोरी 'मिला है जब से तेरा दर नहीं उड़ने की अब हसरत, तेरे दरबार में मुर्शिद कटा कर अपने पर आया।' मसीह निज़ामी ने शेर सुनाया 'मरीजों को यहां इक पल में मिलती है शिफ़ायाबी, न कोई अस्पताल आई न कोई डाक्टर आया।' कलंदर निजामी ने शेर यूं पढ़ा 'गिरा जब तेरे कदमों में तो रुतबा औज पर आया, तसव्वफ़ का हमें तो बस यही मरकज नज़र आया।' इनायत मोईन चिश्ती ने शेर सुनकर खूब वाह वाही लूटी 'मैं ...
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