नई दिल्ली, जनवरी 16 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी मामले में व्यक्ति का मृत्यु-पूर्व विश्वसनीय और भरोसेमंद अंतिम बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) मौजूद है, तो मकसद के ठोस सबूत न होने पर भी यह अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करता। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने चमन लाल को अपनी पत्नी सरो देवी पर केरोसिन डालकर आग लगाने के मामले में बरी किए जाने के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। बेंच ने कहा कि मकसद का महत्व मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामलों में होता है।निचली अदालत का फैसले बरकरार सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें चमन लाल को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मृत्यु ...