रायपुर, अक्टूबर 25 -- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में साफ किया है कि अगर उत्तराधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के लागू होने से पहले शुरू हुआ था तो बेटी अपने पिता की संपत्ति में हिस्से का दावा नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में, विरासत मिताक्षरा कानून के तहत आती है, जिसके तहत बेटी को तभी विरासत मिलती है जब कोई पुरुष वारिस न हो। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला 13 अक्टूबर को जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने रगमनिया (मृतक) बनाम जगमेट और अन्य के मामले में सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को बरकरार रखा, जिसने सरगुजा जिले में अपने दिवंगत पिता की पुश्तैनी संपत्ति में हिस्से के लिए रगमनिया के दावे को खारिज कर दिया था।1956 से पहले हुई मौतों पर मिताक्षरा कानून लागू होता है कोर्ट ने समझाया 1956 से पहले...
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