संभल, मई 13 -- श्रीकल्कि सेना द्वारा सोमवार को भगवान महात्मा बुद्ध की जयंती श्रीकल्कि विष्णु मंदिर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। जयंती का शुभारंभ भगवान महात्मा बुद्ध के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अध्यक्ष कुलदीप कुमार गुप्ता ने कहा महात्मा बुद्ध का मन बचपन से ही करुणा और दया का स्रोत था। इसका परिचय उनके आरंभिक जीवन की अनेक घटनाओं से पता चलता है। घुड़दौड़ में जब घोड़े के मुंह से झाग निकलने लगता है तो सिद्धार्थ उसे थका जानकर वहीं रोक देते हैं और जीती हुई बाजी हार जाते हैं। खेल में भी सिद्धार्थ को खुद हार जाना पसंद था क्योंकि किसी को हराना और किसी का दुःखी होना उनसे नहीं देखा जाता था। सिद्धार्थ ने अपने चचेरे भाई देवदत्त द्वारा तीर से घायल किए गए हंस की सहायता की और उसके प्राणों की रक्षा की। उज्ज्वल सक्सेना ने कहा भगवान बुद्...