नई दिल्ली।, अक्टूबर 30 -- राज्य न्यायिक अधिकारियों के सेवा नियमों को लेकर दो दशक से चल रहे असंतोष ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट शब्दों में कहा कि उसे इस मामले में "हैंड्स-ऑफ अप्रोच" (हस्तक्षेप न करने का रुख) अपनाना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि जिला न्यायपालिका पर अनुच्छेद 227(1) के तहत निगरानी का अधिकार हाईकोर्ट के पास है, इसलिए सेवा नियमों का ढांचा तैयार करने का काम भी हाईकोर्ट को ही करना चाहिए।" हाईकोर्ट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, "क्यों हाईकोर्ट को उसके संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों से वंचित किया जा रहा है? अब समय आ गया है कि हाईकोर्ट को कमजोर करने की जगह मजबूत किया जाए। बात बहुत आगे बढ़ चुकी है।" उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को जिला न्यायाधीशों की ...