नई दिल्ली। हिन्दुस्तान, जुलाई 6 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली किराया नियंत्रण (डीआरसी) अधिनियम, 1958 एक पुराने कानून का घोर दुरुपयोग है। इस अधिनियम के तहत संपन्न किरायेदार मामूली किराया देकर गलत तरीके से परिसर पर कब्जा कर लेते हैं, जबकि मकान मालिकों को निर्धन व निराशाजनक परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर किया जाता है। यह पूरी तरह से अनुचित और अवैध है। मकान मालिक को उसका हक मिलना चाहिए। हाईकोर्ट अतिरिक्त किराया नियंत्रक (एआरसी) के 2013 के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रहा था। इसमें सदर बाजार में एक संपत्ति के ब्रिटेन व दुबई स्थित मालिकों की बेदखली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था और किरायेदारों के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। यह भी पढ़ें- बुजुर्ग को तरसाने वाले बेटे-बहू को छोड़ना होगा घर, दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश य...
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