नई दिल्ली, दिसम्बर 28 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग सौतेली बेटी से दुष्कर्म करने के मामले में दोषी पिता की 20 साल की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने साफ कहा कि अगर पीड़िता बाद में अपने बयान से पलट भी जाए, तो केवल इसी आधार पर पॉक्सो कानून के तहत दर्ज अपराध को खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वे अक्सर परिवार के दबाव में आ जाते हैं और असहाय होते हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी बच्चे को अपने ही सगे को बचाने के बोझ तले नहीं डाला जा सकता। यह भी पढ़ें- बुराड़ी में शर्मनाक घटना, 52 वर्षीय मकान मालिक ने किरायेदार की बेटी से किया रेप मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने कहा कि कई बार बच्ची को डर होता है कि अगर उसने सच बोला तो उसे घर, आर्थिक सहारे और परिवार...
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