नई दिल्ली, नवम्बर 10 -- जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है, दीपावली की रात से बिगड़ी प्रदूषण की स्थिति राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बद से बदतर होती जा रही है। वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट के कारण अब सांस लेना दूभर होने लगा है। एक्यूआई की तरह ही दिल्ली वालों की मायूसी भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। वे यही पूछ रहे हैं कि अब कहां जाएं हम? सुबह की सैर तो छोड़िए, प्रदूषण घर में घुसकर मार रहा है। इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए? जिस सरकार पर दिल्ली की हवा को प्रदूषण से बचाने की पहली जिम्मेदारी है, उसने खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर पटाखे चलाने की इजाजत मांगी और सिर्फ हरित पटाखे छोड़े जाएं, यह सुनिश्चित करने में बुरी तरह नाकाम रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ का पीएम10 सांद्रता के लिए दैनिक दिशा-निर्देश 45 माइक्रोग्राम/ प्रति घनमीटर है, जबक...