नई दिल्ली, अक्टूबर 16 -- प्रवीण कौशल,तकनीक और सामाजिक उद्यमी दीपावली के दिन करीब आते ही सड़क मार्ग से दिल्ली-गुरुग्राम की दैनिक यात्रा करने वाले लाखों लोगों की चिंताएं गहराने लगी हैं। वजह? भयानक ट्रैफिक! यूं भी हर सुबह गुरुग्राम एक धीमी गति वाले अव्यवस्थित नाटक में बदल जाता है। हॉर्न की आवाजें, धुएं के बादल और झुंझलाहट- ये सब मिलकर एक ऐसे चक्र का निर्माण करते हैं, जिसे हमने सामान्य जीवन मान लिया है। दस किलोमीटर की दूरी तय करने में दो-दो घंटे लगना, आसमान छूता मानसिक तनाव और गिरती उत्पादकता, मगर जवाबदेही किसी की नहीं। अगर हम इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में देखते, तो शायद कुछ कार्रवाई करते। रोजाना का जाम केवल असुविधा नहीं है, यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफी नुकसानदेह है। मगर सरकारें और समाज, दोनों ने इसे 'न्यू नॉर्मल' के ...
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