नई दिल्ली, फरवरी 12 -- हिमाचल प्रदेश के लोगों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राज्य में निजी भूमि पर सूखे, गिरे हुए, फफूंद से प्रभावित और सड़े हुए खैर के पेड़ों को काटने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। खैर के पेड़ पान में इस्तेमाल होने वाले 'कत्था' और उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी के उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। ये हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड में कुछ हिस्सों के पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि पर्वतीय राज्य में पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगाने वाले शीर्ष अदालत के 1996 के आदेश में 16 फरवरी, 2018 और 10 मई, 2023 को पहले ही संशोधन किया जा चुका है। इससे खैर के पेड़ों की कटाई की अनुमति मिल गई है।
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