रांची, सितम्बर 17 -- श्रेयसी मिश्रा रांची। बिड़ला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी) मेसरा के सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग में एक अहम शोध हुआ है, जिससे झारखंड की आर्सेनिक प्रभावित मिट्टी को सुधारने की नई उम्मीद मिली है। यह शोध एसोसिएट प्रोफेसर डॉ तनुश्री भट्टाचार्य के मार्गदर्शन में यूजीसी-जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्राप्त शोधार्थी अभिषेक कुमार द्वारा किया गया है। शोध का विषय है- 'मिट्टी की गुणवत्ता सुधार और आर्सेनिक निष्कासन के लिए बायोचार का उपयोग।' इस तकनीक से न सिर्फ जहरीले तत्वों को मिट्टी से हटाने में मदद मिलेगी, बल्कि खेती योग्य भूमि की उर्वरता भी बढ़ेगी। शोध में घरेलू और कृषि अपशिष्ट से तैयार हुआ बायोचार : बीआईटी मेसरा के शोध में पराली, रसोई कचरा, पत्तियों, पुतुश (लैंटाना), संतरे और अखरोट के छिलकों जैसे जैविक अपशिष्टों से बायोचार तै...
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