दरभंगा, जुलाई 1 -- दरभंगा। लनामिवि के पीजी हिंदी विभाग में सोमवार को सुप्रसिद्ध दलित साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि दलित साहित्य ने ही हिन्दी साहित्य में सबसे पहले यथार्थवाद को साकार किया। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश वाल्मीकि या अन्य दलित साहित्यकारों की रचनाओं में सामाजिक यथार्थ का सबसे प्रामाणिक चित्रण देखने को मिलता है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल उनकी आत्मकथा जूठन है, जो भारतीय समाज के वीभत्स्य यथार्थ को पूर्ण जीवंतता के साथ अभिव्यक्त करती है। वाल्मीकि ने दलित जीवन के सांस्कृतिक पक्ष को कभी अनदेखा नहीं किया। दलित वर्ग के सांस्कृतिक पक्ष की उपेक्षा कर हम वंचित वर्ग के यथार्थ को पूर्णता में समझ ही नहीं सकते। दलित साहित्य महज सिलेबस और परी...
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