लखनऊ, जुलाई 21 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने एक आदेश में कहा है कि हिन्दू विवाह स्टाम्प पर लिख देने भर से समाप्त नहीं होता, हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 के प्रावधानों के तहत ही हिन्दू पति-पत्नी के बीच तलाक संभव है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्य समाज मंदिर से जारी विवाह का प्रमाण पत्र विवाह का वैध साक्ष्य नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने डॉली रानी की सेवा संबंधी याचिका पर दिया। अनुकंपा नियुक्ति से संबधित इस मामले में याची ने दलील दी थी कि कृषि विभाग में कार्यरत नीरज गिरी के साथ, उसकी पहली पत्नी का तलाक होने के बाद 2021 में उसने आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। याची नेे आर्य समाज मंदिर से जारी विवाह का प्रमाण पत्र भी पेश किया। पहली पत्नी से तला...
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