नई दिल्ली, जनवरी 3 -- हिंदू विवाह को संस्कारों में सबसे पवित्र माना जाता है। इसमें सप्तपदी यानी 7 फेरे सबसे महत्वपूर्ण रस्म है। अग्नि के साक्षी में वर-वधू 7 फेरे लेते हैं और जीवन भर साथ निभाने के 7 वचन देते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि सप्तपदी के बिना विवाह अधूरा रहता है। 7 फेरे इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि ये संख्या सात्विक और पूर्णता का प्रतीक है। सात ग्रह, सात रंग, सात स्वर और सात लोक, सबमें 7 का महत्व है। सप्तपदी से वर-वधू एक-दूसरे के जीवनसाथी बनते हैं और वैवाहिक जीवन की नींव मजबूत होती है। आइए विस्तार से समझते हैं इसका महत्व।सप्तपदी की विधि और प्रक्रिया सप्तपदी में दूल्हा-दुल्हन अग्नि के चारों ओर 7 चक्कर लगाते हैं। पहला फेरा दुल्हन आगे रहकर लेती है, बाकी 6 फेरे दूल्हा आगे रहकर लेता है। प्रत्येक फेरे के साथ पंडित जी वैदिक मंत्र पढ़ते ...
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